Thursday, June 22, 2006

हाइकु कविताएँ


घूमे घर में
दिन भर गौरैया
बिना बुलाये ।
***

चुराती रस
फूलों से मधुमक्खी
बनाती मधु ।
***

वर्षों पहले
बन्दर बना मामा
बच्चों का ही क्यों ?
***

कु० ईप्सा

1 comment:

Vidur Jyoti said...

बच्चों के मामा
फिर से लौटा
बचपन मेरा